Thursday, April 3, 2014

आम चुनाव 2014:


03-अप्रैल-2014 15:51 IST
विशेष वेब-पोर्टल की शुरूआत और संदर्भ पुस्तिका का विमोचन
The Principal Director General (M&C), Press Information Bureau, Smt. Neelam Kapur launching the PIB’s special web-portal for General Elections 2014, in New Delhi on April 03, 2014.
पत्र सूचना कार्यालय की प्रधान महानिदेशक (मीडिया एवं संचार), श्रीमती नीलम कपूर 3 अप्रैल, 2014 को नई दिल्ली में पत्र सूचना कार्यालय के विशेष वेब-पोर्टल की शुरूआत करते हुए।
नई दिल्ली: 3 अप्रैल 2014: (पीआईबी): 
देश में 16वीं लोकसभा के प्रतिनिधियों का चयन करने के लिए आम चुनाव होने जा रहे हैं। पत्र सूचना कार्यालय ने इस विशाल आयोजन के बारे में सूचना उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाने की योजना बनाई है। 

आम चुनाव से जुड़े विविध पहलुओं पर कई तथ्य पत्र, संदर्भ सामग्री और लेख पहले ही जारी किए जा चुके हैं। संदर्भ सामग्री में 15वीं लोकसभा के चुनावों (2009 के आम चुनाव) पर विशेष ध्यान केन्द्रित करते हुए पिछले चुनावों के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत और गहन विश्लेषण किया गया है। राज्यवार तथ्य पत्र जारी किए गए हैं, जो विभिन्न राज्यों के मतदाताओं, संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों तथा पिछले चुनावों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। 

आम चुनावों से संबंधित बहुत सारे विशेष लेख भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त हुए हैं। ये लेख "भारत में निर्वाचन प्रणाली का विकास", "भारत में चुनाव कानून", "जन-प्रतिनिधित्व कानून 1952 की मुख्य विशेषताएं", मतदाता जागरूकता के लिए "एसवीईईपी कार्यक्रम " जैसे विषयों पर हैं। इन विशेष लेखों में एनओटीए और वीवीपीएटी जैसी नई बातें मीडिया के लिए दिशा निर्देश, पेड न्यूज, चुनाव-पूर्व सर्वेक्षण और चुनाव-उपरांत सर्वेक्षण जैसे विषय भी शामिल किए गए हैं। 

पत्र सूचना कार्यालय में की प्रधान महानिदेशक श्रीमती नीलम कपूर ने आज "आम चुनाव-2014 : संदर्भ पुस्तिका" का विमोचन किया। यह संदर्भ पुस्तिका पिछले चुनावों और आम चुनावों से संबंधित नवीनतम प्रावधानों का सार-संग्रह है। अंग्रेजी और हिन्दी के अलावा यह संदर्भ पुस्तिका 11 क्षेत्रीय भाषाओं - असमी, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगू और उर्दू में भी उपलब्ध कराई जाएगी। 

साथ ही, पत्र सूचना कार्यालय ने आम चुनाव-2014 को समर्पित एक वेब पोर्टल : pib.nic.in/elections2014 की शुरूआत की है। इसका इस्तेमाल भारत निर्वाचन आयोग के महत्वपूर्ण निर्देशों, आदेशों और प्रेस विज्ञप्तियों के प्रसार के लिए किया जाएगा। संदर्भ पुस्तिका भी इस पोर्टल पर उपलब्ध होगी। मतगणना वाले दिन यानी 16 मई, 2014 को इस पोर्टल का इस्तेमाल भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए वास्तविक आंकड़ों के आधार पर आधिकारिक रूझानों और नतीजों का प्रसार करने के लिए भी किया जाएगा। ये रूझान और नतीजे एसएमएस के माध्यम से सोशल मीडिया के साथ भी साझा किए जाएंगे। 

परिणामों की घोषणा के बाद पत्र सूचना कार्यालय 16वें आम चुनावों का विस्तार से विश्लेषण करेगा और बाद में उसका संकलन भी जारी किया जाएगा।  

वि.कासोटिया/एएम/आरके/एमएस-1302

Saturday, March 15, 2014

दिल्ली में होने वाली बेजबरूआ समिति की बैठकें स्थगित

15-मार्च-2014 20:03 IST
नई दिल्ली में 18 से 24 मार्च 2014 के बीच होनी थीं बैठकें
नई दिल्ली: 15 मार्च 2014: (पीआईबी):
पूर्वोत्तर के लोगों की विभिन्न चिंताओं पर विचार के लिए पूर्वोत्तर परिषद के सदस्य श्री एम.पी.बेजबरूआ की अध्यक्षता में समिति की नई दिल्ली में 18 से 24 मार्च 2014 के बीच निर्धारित बैठकें स्थगित कर दी गयी हैं।

समिति का दिल्ली में रह रहे पूर्वोत्तर राज्यों के विधार्थियों/पेशेवरों और अन्य विभिन्न लोगों, गैर-सरकारी संगठनों, विधार्थी संगठनों और अन्य संघों के साथ विचार-विमर्श कर उनसे सुझाव प्राप्त करने का कार्यक्रम था।

देश के विभिन्न भागों विशेष तौर पर महानगर क्षेत्रों में रह रहे पूर्वोत्तर राज्यों से आए लोगों की अलग-अलग किस्म की चिंताओं पर विचार करने के लिए पिछले महीने केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने समिति का गठन किया था। समिति से सरकार द्वारा उठाए जा सकने वाले एहतियाती उपायों का सुझाव देने को कहा गया था।

Tuesday, February 25, 2014

निरंकारी बाबा का 60वां जन्मदिवस

वृक्षारोपण एवं सफाई अभियान से मनाया 60वां जन्मदिवस 
संत निरंकारी कालोनी, दिल्ली 23 फ़रवरी 2014: (कृपा सागर//सतपाल सोनी//दिल्ली स्क्रीन):
जब सियासतदान अपने सियासी खेलों में और कारोबारी अपने अपने कारोबारों में मसरूफ थे उस समय कुछ गिने चुने लोग पर्यावरण की भी चिंता कर रहे थे तांकि आज की पीढ़ी को सवच्छ जीवन और तंदरुस्ती देने के साथ साथ भविष्य को भी सुरक्षित किया जा सके। निरंकारी मंडल से इन जुड़े इन लोगों ने अपने बाबा का जन्म दिन वृक्षारोपण करके मनाया।
बाबा जी ने स्वयं किया उद्घाटन
मिशन के द्वारा जहाँ पर जीवन में आध्यात्मिकता को मजबूत करने के लिये योगदान दिये जाते है वहीं हर नागरिक की भांति अन्य पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाता है। इसीलिए प्रत्येक वर्ष की तरह आज भी देश तथा विश्वभर में वृक्षारोपण तथा सफाई अभियान चलाया जा रहा है। वृक्षारोपण का उदद्श्ेय है कि संसार का वातावरण प्रदूषण रहित बना रहे, उसमें उचित संतुलन बना रहे ताकि इस धरती पर बसने वाले लोग सहूलियत से जी सके। एक हरियाली बाहर भी हो और जीवन में भी।
   
    ये उद्गार आज यहां निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज ने उस समय व्यक्त किये जब वह समागम ग्राउण्ड न.8 के परिसर में एक पौधा लगाकर विश्वभर में चलाये जा रहे वृक्षारोपण एवं सफाई अभियान का उद्घाटन कर रहे थे।

    बाबा जी ने कहा कि सफाई अभियान भी विश्वभर में चलाया जा रहा है। खास तौर पर सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर बल दिया जा रहा है, ताकि कोई रोग न फैले। हमारा मन भी शुद्ध हो, हम मानवीय गुणों को अपनाएं और वातावरण भी स्वच्छ हो।

    संत निरंकारी मिशन के भक्तों ने आज यह अभियान बाबा जी का 60वाँ जन्मदिवस मनाते हुए चलाया। संत निरंकारी चैरिटेबल फाउन्डेशन के तत्वाधान में मिशन की भारत तथा दूर देशों में सभी शाखाओं ने इस में भाग लिया।

    मिशन के श्रद्धालु भक्तों ने जहां वृक्षारोपण के लिये अपने भवनों तथा आसपास के क्षेत्रों को चुना, सफाई अभियान के अंतर्गत रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों अस्पतालों, स्कूलों कॉलेजों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों की सफाई की। उनका उदद्ेश्य था जन-जन को वातावरण से प्रदूषण दूर करने के लिये प्रेरित करना। इसके साथ ही वह स्वार्थरहित सेवा का उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहे थे।

    दिल्ली में द्वारका के सेक्टर 19 की हरी पटट्ी में लगभग 500 पेड़ लगाये गये। सफाई के लिए मुख्य रूप से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को चुना गया। यहां लगभग 1500 श्रद्धालु भक्तों ने 4 घंटे तक सेवा करके पूरे क्षेत्र को साफ किया।
गुरु पूजा दिवस
    वर्ष 2003 से 23 फरवरी को गुरु पूजा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर संत निरंकारी सेवादल द्वारा रैली तथा साध संगत द्वारा विशेष सत्संग का आयोजन किया जाता है। इस से पूर्व यह कार्यक्रम 15 अगस्त को मुक्ति पर्व के साथ आयोजित किया जाता था जहां सेवादल के भाई-बहन सद्गुरु के प्रति तन, मन, धन की सेवाएं अर्पित करते और सद्गुरु से मानव समाज की निःस्वार्थ सेवा की कामना करते। अब ये कार्यक्रम 23 फरवरी यानि कि बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के जन्म दिवस के साथ जुड़ गया है। इस वर्ष भी यह सेवादल रैली मिशन की हर शाखा ने आज आयोजित की परंतु दिल्ली में इस रैली का आयोजन कल ही किया गया।  रैली में सेवादल के हज़ारों भाई-बहनों ने भाग लिया जिनमें 50 से अधिक अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने पी.टी. परेड तथा कुछ खेलों के अलावा एक सुन्दर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसमें भक्ति में सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। यहां अनुशासन, लगन तथा मिलवर्तन पर भी बल दिया गया।

    रैली को सम्बोधित करते हुये बाबा जी ने सेवादल के योगदान की सरहाना की और कहा कि मिशन के विकास के साथ-साथ सेवादल में भी निरंतर वृद्धि हुई है और ये भाई बहन केवल सत्संग कार्यक्रम अथवा समागमों में ही सेवा नहीं करते बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के समय भी भरपूर योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में इंग्लैण्ड में जो बाढ़ की स्थतिति बनी उससे भी प्रभावित लोगांे की सहायता के लिये वहां के सेवादल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    बाबा जी ने फरमाया कि यहां सेवा को मजबूरी नहीं बल्कि सौभाग्य समझा जाता है और ऐसी भावना के लिए बहुत ही तप त्याग की जरुरत होती है, क्योंकि सेवादल की भी अपनी-अपनी पारिवारिक तथा सामाजिक ज़िम्मेदारियां होती है।

    इससे पूर्व सेवादल के मेम्बर इंचार्ज भी श्री एच.एल. अरोड़ा जी ने बाबा जी तथा पूज्य माता जी का स्वागत किया और आशीर्वाद मांगा कि सेवादल के भाई बहन पूर्ण मर्यादा, लगन तथा मिलवर्तन की भावना से मिशन तथा समाज की सेवा करते रहें।
                               निरंकारी बाबा का 60वां जन्मदिवस

Thursday, August 15, 2013

लाल कि‍ले से प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

15-अगस्त-2013 08:42 IST
आज यकीनन ही खुशी का दिन लेकिन हमारे दिलों में दर्द भी है
लाल किले की ऐतिहासिक प्राचीर से जय हिन्द का जय घोष करते प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह 
आज प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने स्‍वतंत्रता दि‍वस 2013 के अवसर पर लाल कि‍ले के प्राचीर से देश को संबोधि‍त कि‍या । इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है - 

“मेरे प्यारे भारतवासियो, 

भाइयो-बहनो और प्यारे बच्चो, 

मैं आप सभी को इस स्वाधीनता दिवस पर बधाई देता हूँ। 

आज यकीनन ही खुशी का दिन है। लेकिन आज़ादी के इस त्यौहार पर हमारे दिलों में इस बात का दर्द भी है कि उत्तराखण्ड के हमारे भाई-बहनों को करीब दो महीने पहले भारी तबाही का सामना करना पड़ा। हमारी संवेदना और सहानुभूति उन सभी परिवारों के साथ है जिनको जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा । मैं आज उत्तराखण्ड की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इस मुश्किल की घड़ी में सारा देश उनके साथ है। हमारी सरकार जल्द से जल्द लोगों के उजड़े हुए घर दोबारा बसाने और बर्बाद हुए Infrastructure को फिर से बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत से काम कर रही है। 

उत्तराखण्ड में कठिन परिस्थितियों में हमारी फौज़, अर्धसैनिक बलों और केन्द्र और राज्य सरकार के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों ने आम लोगों के साथ मिलकर, घिरे हुए लोगों को राहत पहुंचाने का जो काम किया, वह तारीफ के काबिल है। हम ख़ास तौर पर Air Force, ITBP और NDRF के उन अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने दूसरों को बचाने में अपनी जान कुर्बान कर दी। 

हमें इस बात का भी बेहद अफसोस है कि कल एक दुर्घटना में हमने अपनी पनडुब्बी INS Sindhurakshak को खो दिया। इस हादसे में 18 बहादुर नौसैनिकों के शहीद होने की आशंका है। यह नुकसान इसलिए और भी दर्दनाक है क्योंकि अभी हाल में हमारी Navy ने अपनी पहली Nuclear पनडुब्बी Arihant और Aircraft Carrier, INS Vikrant के रूप में दो बड़ी कामयाबियां हासिल की थीं। 

हम शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। साथ-साथ Navy की सफलताओं के लिए उन्हें मुबारकबाद भी देते हैं। 

भाइयो और बहनो, 

1947 में महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में हमने आज़ादी हासिल की। उसके बाद के अपने सफर पर अगर हम ग़ौर करें तो पाएंगे कि हर दस साल पर हमारे देश में बड़े बदलाव आए हैं।

1950 के दशक में पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के नेतृत्व में एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में भारत ने अपने पहले कदम रखे। देश में Atomic Energy Commission, योजना आयोग और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं की स्थापना की गई जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्र निर्माण के काम में बहुत बड़ा योगदान दिया। पहली बार आम चुनाव कराए गए और देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए पहली पंचवर्षीय योजना बनाने का सिलसिला शुरू किया गया। 

1960 के दशक में पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने नए-नए उद्योग और कारखाने लगवाए, नई सिंचाई परियोजनाएं शुरू की और नए विश्वविद्यालय खोले। राष्ट्र निर्माण में विज्ञान और Technology के महत्व पर ज़ोर देकर उन्होंने इस प्राचीन देश को एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया। 

1970 के दशक में इंदिरा जी ने हमारे राष्ट्र का आत्मविश्वास बढ़ाया। इस दौरान हमने अंतरिक्ष में अपना पहला उपग्रह छोड़ा। हरित क्रांति ने पहली बार हमें अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्रदान की। 

राजीव गांधी जी ने अगले दशक में तकनीकी और आर्थिक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान Information Technology के क्षेत्र में हमारी प्रगति की नींव रखी गई। 

पंचायती राज संस्थाओं के महत्व पर ज़ोर दिया गया जिसकी वजह से आगे चलकर इन संस्थाओं को मज़बूत और अधिकार संपन्न बनाने के लिए हमारे संविधान में संशोधन हुआ। 

साल 1991 में हमने श्री नरसिम्हा राव जी के नेतृत्व में एक बहुत बड़े आर्थिक संकट का सामना बख़ूबी किया और देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए आर्थिक सुधारों को अपनाया। उस समय इन सुधारों का कई राजनैतिक दलों ने विरोध किया। लेकिन ये सुधार राष्ट्र हित में थे और इसीलिए बाद में आने वाली सभी सरकारों ने उनको जारी रखा। साल 1991 से लेकर आज तक सुधारों की ये प्रक्रिया आगे बढ़ती रही है। 

भाइयो और बहनो, 

मेरा मानना है कि पिछला दशक भी हमारे देश के इतिहास में बहुत बड़े बदलावों का दशक रहा है। देश की आर्थिक समृद्धि जितनी इस दशक में बढ़ी है उतनी पहले किसी दशक में नहीं बढ़ी। लोकतांत्रिक ताकतों को बढ़ावा मिला है और समाज के बहुत से वर्ग विकास की प्रक्रिया से पहली बार जुड़े हैं। आम आदमी को नए अधिकार मिले हैं जिनकी बदौलत उसकी सामाजिक और आर्थिक ताकत बढ़ी है। 

भाइयो और बहनो, 

मई 2004 में पहली UPA सरकार सत्ता में आई थी। तब से लेकर आज तक हमने एक प्रगतिशील और आधुनिक भारत बनाने के लिए लगन और ईमानदारी से काम किया है। 

हमने एक खुशहाल भारत की कल्पना की है। एक ऐसा भारत जो सदियों से चले आ रहे गरीबी, भूख और बीमारी के बोझ से मुक्ति पा चुका हो। जहाँ शिक्षा के उजाले से अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधेरे दूर हो चुके हों। 

जहां सामाजिक समानता हो और सबको एक जैसे आर्थिक अवसर प्राप्त हों। जहाँ समाज के किसी भी तबके को अन्याय और शोषण का सामना न करना पड़े। 

हमने एक ऐसे भारत का सपना देखा है जहाँ नौजवानों को रोज़गार के ऐसे अवसर मिलें जिनके जरिए वह राष्ट्र निर्माण के महान काम में योगदान कर सकें। 

हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज़ बुलंद करनी चाही है। हमने एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहा है जिसे सारी दुनिया आदर और सम्मान के साथ देखे। 

इन सपनों को साकार करने के लिए हमने कई कदम उठाए हैं। लेकिन सफर लंबा है, अभी बहुत फासला और तय करना है। 

भाइयो और बहनों, 

अभी कुछ दिन पहले हमने Food Security कानून बनाने की दिशा में एक Ordinance जारी किया है। Food Security Bill अब संसद के सामने है और हमें उम्मीद है यह जल्द ही पास हो जाएगा। इस कानून का फायदा हमारे गांवों की 75 प्रतिशत और शहरों की आधी आबादी को पहुंचेगा। इसके तहत 81 करोड़ भारतीयों को 3 रुपये प्रति किलो चावल, 2 रुपये प्रति किलो गेहूं और 1 रुपये प्रति किलो मोटा अनाज मिल पाएगा। यह दुनिया भर में इस तरह का सबसे बड़ा प्रयास है। 

हम अपने किसानों की मेहनत की वजह से ही इस कानून को लागू कर पाए हैं। साल 2011-12 में हमारी अनाज पैदावार 25.9 करोड़ टन रही, जो एक रिकार्ड है। 

बिना तेज़ कृषि विकास के हम अपने गांवों में खुशहाली पहुंचाने का मक़सद हासिल नहीं कर सकते हैं। पैदावार बढ़ाने और किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलवाने के लिए हमने लगातार कोशिशें की है। फसलों के खरीद मूल्यों में पिछले 9 सालों में पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ोत्तरी की गई है। गेहूं और धान के खरीद मूल्य दुगुने से भी अधिक किए गए हैं। कई ऐसे राज्यों में जहां पहले अनाज की कमी रहती थी आज उनकी अपनी ज़रूरत से ज़्यादा पैदावार हो रही है। 

11 वीं पंच-वर्षीय योजना के दौरान कृषि विकास की औसत सालाना दर 3.6 प्रतिशत रही है जो 9वीं और 10वीं योजना, दोनों से ज्यादा है। 

अब ग्रामीण इलाकों में खुशहाली बढ़ने के साफ संकेत दिखाई देने लगे हैं। साल 2004 से लेकर 2011 तक प्रतिव्यक्ति उपभोग किया जा रहा सामान और सुविधाएं पहले के मुकाबले चार गुना तेजी से बढ़े हैं। 

ग्रामीण मजदूरी दर में भी कहीं अधिक तेजी से वृद्धि हुई है। मनरेगा की बदौलत ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों गरीब लोगों को रोज़गार मिल रहा है। 

गरीबी को नापना एक मुश्किल काम है। गरीबी की परिभाषा को लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हम गरीबी की चाहे कोई भी परिभाषा अपनाएं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि 2004 के बाद गरीबी कम होने की गति तेज़ हुई है। 

कई ऐसे राज्य, जो बहुत समय से पिछड़े माने जाते थे और जिनमें से कुछ को "बीमारू" कहा जाता था, आज तेज़ी से विकास कर रहे हैं। 

भारत में हर बच्चे को शिक्षा के अवसर देने के लिए हमने शिक्षा का अधिकार कानून बनाया है। आज देश में लगभग सभी बच्चे प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे हैं। 

कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या पिछले नौ सालों में दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है। गरीबों और कमजोर तबकों के बच्चों को शिक्षा के अवसरों का फायदा दिलाने के लिए हमने बड़े पैमाने पर वज़ीफों के कार्यक्रम शुरू किए हैं। आज देश भर में 2 करोड़ से ज़्यादा बच्चों को केन्द्र सरकार द्वारा वज़ीफे दिए जा रहे हैं। 

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नए संस्थान खोले गए हैं। जैसे 8 नए IIT, 7 नए IIM, 16 नई Central Universities और 10 नए NIT । Scientific Research को बढ़ावा देने के लिए भी नई संस्थाएं खोली गई हैं। Science की पढ़ाई में ज्यादा छात्रों को शामिल करने के लिए और विदेशों से भारतीय Scientists की वापसी आसान करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। 

लेकिन शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बहुत सारे स्कूलों में अभी भी पीने का साफ पानी, शौचालय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। शिक्षा की Quality को बेहतर बनाने की ज़रूरत है। इसके लिए अध्यापकों की training पर ज़्यादा जोर दिया जाना आवश्यक है। 

Mid-day-Meal योजना में रोज करीब 11 करोड़ बच्चों को स्कूलों में दोपहर का खाना दिया जा रहा है। यह योजना बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। लेकिन इसको बेहतर तरह से लागू करना भी बहुत ज़रूरी है। बिहार में पिछले दिनों जो दर्दनाक हादसा हुआ वह देश में कहीं भी दोबारा नहीं होना चाहिए। 

2005 में हमने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरूआत की थी। इस मिशन के अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। देश में Maternal Mortality Rate और Infant Mortality Rate दोनों तेज़ी से घटे हैं। पहले से कहीं अधिक बच्चों का जन्म आज अस्पतालों में होता है। टीकाकरण के प्रतिशत में भी काफी वृद्धि हुई है। 

पिछले दो सालों से हमारे देश में पोलियो का कोई भी केस सामने नहीं आया है। हमें एक ऐसे रोग को मिटाने में कामयाबी मिली है जो लाखों लोगों को अपंग बना दिया करता था। 

हमारे ग़रीब भाई-बहनों को अस्पतालों में इलाज के लिए मुफ्त बीमा सुविधा प्रदान कराने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना अब साढ़े तीन करोड़ परिवारों को फायदा पहुंचा रही है। 

हमने शहरी क्षेत्रों में भी Health Mission लागू किया है जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और उनमें सुधार आएगा। 

महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर करने के लिए, हमने महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित कानून को मज़बूत बनाया है। 

Infrastructure यानि सड़कों, रेलगाड़ी, बिजली उत्पादन, Civil Aviation, बंदरगाहों और Telecom जैसे क्षेत्रों में भी पिछले 9 सालों में काफी तरक्की हुई है। गांवों को जोड़ने वाली प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2 लाख किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। सैंतीस हजार Kilometer से ज़्यादा नए Highway बनाए गए हैं जिनसे व्यापार और यात्रा अब ज़्यादा आसान हो गए हैं। चालीस से ज़्यादा हवाई अड्डों का निर्माण या नवीनीकरण किया गया है। सन् 2004 में सिर्फ 7 प्रतिशत लागों के पास telephone connection थे। आज 73 प्रतिशत लोगों को यह सुविधा प्राप्त है। ग्रामीण इलाकों में यह प्रतिशत 2 से बढ़कर 40 हो गया है। बिजली उत्पादन में रिकार्ड बढ़ोत्तरी हुई है। 

भाइयो और बहनो, 

हाल के महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में यह बात चर्चा में रही है कि पिछले साल हमारी विकास दर कम होकर 5% रह गई है। यह बात सच है और हम इस हालत में सुधार लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सिर्फ हमारा देश ही अकेला आर्थिक कठिनाईयों का सामना नहीं कर रहा है। पूरी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए पिछला साल मुश्किल भरा रहा है। यूरोप के बड़े देशों में इस वक्त मंदी चल रही है। दुनिया भर में हर जगह निर्यात बाज़ारों की स्थिति में गिरावट आई है। सभी विकासशील देशों को मंदी का सामना करना पड़ा है। 

मेरा मानना है कि भारत में धीमे विकास का दौर बहुत दिन नहीं चलेगा। पिछले 9 सालों में हमारी अर्थव्यवस्था में औसतन 7.9 प्रतिशत सालाना की बढ़ोत्तरी हुई है। विकास की यह रफ्तार अब तक किसी भी दशक में हुई प्रगति से कहीं ज्यादा है। 

भाइयो और बहनो, 

आज दुनिया के देश एक दूसरे से जितना जुड़े हुए हैं उतना पहले कभी नहीं रहे। हमने अपनी विदेश नीति के जरिए यह कोशिश की है कि भारत को इस बात का पूरा फायदा मिले। दुनिया की बड़ी ताकतों से पिछले 9 सालों में हमारे संबंध लगातार सुधरे हैं। पूर्व और दक्षिण पूर्व Asia में स्थित दस ASEAN राष्ट्रों के साथ हमारी Look East Policy के अच्छे नतीजे सामने आए हैं, खासकर आर्थिक मामलों में। हमारी यह भी कोशिश रही है कि पड़ोसी देशों के साथ हमारी दोस्ती बढ़े। लेकिन पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर होने के लिए यह ज़रूरी है कि वह अपनी सरज़मीन और अपने नियंत्रण वाली ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए न होने दे। 

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति में सुधार हुआ है। 2012 में और इस साल कुछ राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा की चिंताजनक घटनाओं के बावजूद, पिछले 9 साल सांप्रदायिक सद्भाव की दृष्टि से अच्छे गुजरे हैं। आतंकवादी और नक्सली हिंसा में भी कमी आई है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में हमें लगातार सावधानी बरतने की ज़रूरत है। समय-समय पर हो रहे नक्सली हमलों को पूरी तरह रोकने में हम सफल नहीं हो पाए हैं। छत्तीसगढ़ में पिछली 25 मई को जो नक्सली हिंसा हुई वह भारत के लोकतंत्र पर एक सीधा हमला था। भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर हाल में हमारे जवानों पर कायरतापूर्ण हमला किया गया। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे। 

भाइयो और बहनो, 

सरकार के काम को ज़्यादा संवेदनशील, पारदर्शी, और ईमानदार बनाने के लिए हमने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें से मैं सिर्फ दो का ज़िक्र यहां करना चाहूंगा। 

RTI कानून के जरिए आम आदमी को अब सरकारी कामकाज के बारे में पहले से कहीं ज़्यादा जानकारी मिल रही है। इस कानून का इस्तेमाल एक बड़े पैमाने पर, हर स्तर पर हो रहा है। यह कानून अक्सर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को सामने लाता है और सुधार का रास्ता खोलता है। मुझे यकीन है कि आने वाले समय में RTI की वजह से सरकारी कामकाज में और सुधार आएगा । 

हमने संसद में लोकपाल बिल प्रस्तुत किया है। लोक सभा ने इसे pass कर दिया है और अब इस पर राज्य सभा विचार कर रही है। यह कानून हमारी राजनैतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। 

भाइयो और बहनो, 

हमने पिछले दशक में एक लंबा सफर तय किया है। लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बदलाव का जो सिलसिला हमने शुरू किया है उसे आने वाले वक्त में जारी रखा जाएगा। 

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, तेज़ आर्थिक विकास हमारे देश के लिए बेहद ज़रूरी है। गरीबी दूर करना, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और रोज़गार के नए-नए अवसर पैदा करना – यह सब तेज़ आर्थिक विकास के बगैर मुमकिन नहीं है। पिछले 9 साल में हमने आर्थिक विकास की जो औसत रफ्तार हासिल की है उससे हमारे देश की क्षमताओं का पता चलता है। लेकिन इस वक्त देश के आर्थिक विकास की दर में कमी आई है। हम इस कमी को दूर करने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं। 

उद्योगों के लिए सरकारी मंज़ूरियों की प्रक्रिया को तेज़ करने, देश में उद्योग और व्यापार के लिए बेहतर माहौल बनाने और निवेश को बढ़ाने के लिए हमने हाल ही में कई कदम उठाए हैं। बड़ी परियोजनाओं की मंजूरियों की प्रक्रिया में मदद करने के लिए एक विशेष cell की स्थापना की गई है। Cabinet Committee on Investment रुकी हुई परियोजनाओं की अड़चनें दूर करने का काम कर रही है। 

बिजली उत्पादन बढ़ाने के रास्ते में कोयले की आपूर्ति एक समस्या बन गई थी। इसको हमने काफी हद तक सुलझा लिया है। 

आने वाले महीनों में Infrastructure के क्षेत्र में बहुत सी बड़ी परियोजनाओं पर हम काम शुरू करने वाले हैं। इनमें 2 नए बंदरगाह, 8 नए हवाईअड्डे, नए Industrial Corridors और रेल परियोजनाएं शामिल हैं। 

Foreign Direct Investment को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में हमने कई क्षेत्रों में ऐसे निवेश की सीमा बढ़ाई है और इसकी प्रक्रिया को आसान बनाया है। 

निवेश बढ़ाने की इन कोशिशों के अच्छे नतीजे हमें अगले कुछ महीनों में साफ देखने को मिलेंगे। इससे आर्थिक विकास की रफ्तार तेज़ होगी, रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और infrastructure में भी सुधार आएगा। 

भाइयो और बहनो, 

Food Security कानून बनने के बाद उसे प्रभावी ढंग से लागू करना हमारी प्राथमिकताओं में से एक रहेगी। इस दिशा में हमने राज्यों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। Public Distribution System के Computerization के काम में तेज़ी लाई जाएगी। 

Mid-day-Meal Scheme में सुधार लाए जाएंगे। बच्चों को स्कूल में मिल रहा भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ साफ सुथरे ढंग से बना हुआ होना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए हम ठोस कदम उठाएंगे। 

Skill Development के क्षेत्र में शुरुआत में हम उतनी अच्छी प्रगति नहीं कर पाए जितनी चाहते थे, लेकिन अब इसमें तेज़ी आई है। हमने कुछ महीने पहले National Skill Development Authority का गठन किया है। हम जल्द ही एक नई योजना शुरू करेंगे जिसके तहत उन नौजवानों को लगभग 10 हज़ार रुपये की राशि दी जाएगी, जिन्होंने सफलतापूर्वक नई Skills हासिल की हैं। इस योजना से अगले 12 महीने में करीब 10 लाख नौजवानों को फायदा पहुंचेगा। 

अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए Multi-Sectoral Development Programme में हाल ही में सुधार लाए गए हैं। अब इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। 

Minor Forest Produce के लिए खरीद मूल्य निर्धारित करने की स्कीम को मंजूरी दे दी गई है। इससे हमारे आदिवासी भाई-बहनों को लघु वन उपज के सही दाम मिलेंगे। इस योजना को हम जल्द-से-जल्द लागू करेंगे। 

आदिवासी भाई-बहनों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति और उनके स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर के बारे में सही जानकारी हासिल करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की Report से हमें उनके लिए बेहतर योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। 

हम अपने देश में बहुत सी समस्याओं को बेहतर Technology के ज़रिए हल कर सकते हैं। इसकी एक मिसाल है आधार योजना। इस योजना के तहत इस साल के आख़िर तक पचास करोड़ लोगों को अपनी पहचान साबित करने का जरिया मिलेगा और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उनको सहूलियत पहुंचेगी। इसके ज़रिए हम करोड़ों लोगों को पहली बार बैंकों की सुविधाओं का लाभ दे पाएंगे। 

भाइयो और बहनो, 

एक आधुनिक, प्रगतिशील और Secular देश में तंग और सांप्रदायिक ख्यालों की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। ऐसी सोच हमारे समाज को बांटती है और हमारे लोकतंत्र को कमज़ोर करती है। हमें इसे रोकना होगा। हमें अपनी संस्कृति की उन परंपराओं को मज़बूत करना होगा, जो हमें अन्य विचारधाराओं के प्रति सहनशील होना और उनका सम्मान करना सिखाती हैं। मैं आज सभी राजनैतिक दलों, समाज के सभी वर्गों और आम जनता से इस दिशा में प्रयास करने की अपील करता हूँ । 

भाइयो और बहनो, 

कुछ देर पहले मैंने कहा था कि आज़ादी के बाद के हर दशक में भारत में बड़े परिवर्तन आये हैं। हमें आज यह सोचना है कि आने वाले दस सालों में हम किस तरह का परिवर्तन चाहते हैं। 

पिछले दस सालों में जैसी प्रगति हमने की है यदि हम उसे आगे भी जारी रखें तो वह वक्त दूर नहीं जब भारत को ग़रीबी, भूख, बीमारी और अशिक्षा से complete मुक्ति मिल जाएगी। हमारा भारत खुशहाल होगा और उसकी खुशहाली में सभी नागरिक बराबर के शरीक होंगे चाहे उनका धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा कुछ भी हो। 

इसके लिए हम सबको मिलकर देश में राजनैतिक स्थिरता, सामाजिक एकता और सुरक्षा का माहौल भी बनाना होगा। 

आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा भारत बनाने के लिए अपने आपको फिर से समर्पित करें। 

प्यारे बच्चों, अब आप मेरे साथ मिलकर तीन बार बोलिए… 

जय हिन्द जय हिन्द - जय हिन्द ।”  (PIB)
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शरत/रतनानी/नवनीत/शाहबाज/सनोज/सतीश/लालमणी

Saturday, July 27, 2013

सरना बंधुयों ने फिर किया श्री अकाल तख्त साहिब पर समर्पण

Fri, Jul 26, 2013 at 8:51 PM
दायर केस को वापस लें सरना बंधु-जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब 
कहा-अपनी भूलों की क्षमा याचना के लिए गुरुद्वारा रकाबगंज में करवाए श्री अखंड पाठ 
यथा शक्ति मुताबिक लंगर लगाने का भी आदेश 
श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का इन-बिन करेंगे पालन-सरना बंधु
अमृतसर (गजिंदर सिंह किंग) नवंबर 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों की यादगार के खिलाफ हाईकोर्ट में पटिशन दायर करने के बाद श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किए गए सरना बंधुओं को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने श्री अकाल तख्त साहिब से आदेश दिया है, कि वह उक्त केस को तुरंत वापस लें। इसके अलावा सरना बंधुओं को यह भी आदेश दिया गया है कि वे क्षमा याचना के लिए गुरुद्वारा रकाबगंज में श्री अखंड पाठ के साथ-साथ यथा शक्ति मुताबिक लंर लगाए। उधर, इस मौके पर सरना बंधुओं ने कहा, कि हम श्री अकाल तख्त साहिब के फैसले को मंजूर करते हैं। 
         नवंबर 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों की यादगार को गुरुद्वारा रकाब गंज में बनाए जाने के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किए गए परमजीत सिंह सरना अपने भाई के साथ आज पांच सिंह साहिबानों के समक्ष पेश हुए। इस दौरान उन्होंने पांच सिंह साहिबानों को अपना लिखित स्पष्टीकरण पेश किया। पांच सिंह साहिबानों ने विचार करने के बाद परमजीत सिंह सरना और उनके भाई मंजीत सिंह सरना पर अपना फैसला ले लिया। पांच सिंह साहिबानों के इस फैसले को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब से सुनाया। जिसमें आदेश दिया गया कि सरना बंधु तुरंत कोर्ट में दायर किए गए केस को वापस लें। इसके साथ वे दोनों सिख दंगों के पीड़ित परिवारों के साथ गुरुद्वारा रकाबगंज में श्री अखंड पाठ रखवाएं और यथा शक्ति मुताबिक लंगर भी लगाएं और अपनी भूलों की क्षमा याचना करें।
      इससे पूर्व सिंह साहिबानों से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए परमजीत सिंह सरना और हरविंदर सिंह सरना ने स्पष्ट किया, कि वे श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित हैं और श्री अकाल तख्त साहिब के प्रत्येक आदेश की इन-बिन पालना करेंगे। उन्होंने कहा, कि सिंह साहिबानों ने उनसे यही वादा लिखित में भी लिया है। परमजीत सिंह सरना ने यहां फिर स्पष्ट किया, कि वह सिख विरोधी दंगों में मारे गए लोगों की यादगार के खिलाफ नहीं है। बल्कि वह यह नहीं चाहते हैं, कि गुरुओं के शहीदी स्थल में किसी अन्य की शहीदी यादगार की स्थापना हो। सजा सुनने के बाद भावुक हुए परमजीत सिंह सरना ने कहा, कि वह हमेशा से ही श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित रहें हैं। उन्होंने कहा, कि उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब से जो भी हुकुम हुआ है, वह उन्हें मंजूर है।  
सरना बन्धु श्री अकाल तख्त साहिब के सामने नतमस्तक

Monday, May 27, 2013

छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा पर राष्ट्रपति का वक्तव्य

27-मई-2013 15:20 IST
छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के वक्तव्य का मूल पाठ निम्नलिखित है:
"छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के नेताओं को ले जा रही गाड़ियों के काफिले पर हुए नक्सलियों के बर्बर हमले से मैं बेहद निराश और स्तब्ध हूं। 

मैं इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं और एक बार फिर से दोहराना चाहता हूं कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। राष्ट्र ऐसी घटनाओं से आतंकित या भयभीत नहीं होगा। मैं संबद्ध प्रशासन से अनुरोध करता हूं कि वे इस घटना को अंजाम देने वालों को दंडित करने के लिए हर संभव प्रयास करें। हमारे नागरिकों की सदैव सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। 

मैं इस घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की प्रार्थना करता हूं। " (PIB)
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वि. कासोटिया/इ.अहमद/रीता/शदीद- 2514

Friday, February 15, 2013

दिल्‍ली में तेजी से बढ़े एनफ्लुएंजा के मामले

14-फरवरी-2013 19:22 IST
ऐसी बीमारियों के लक्षण बुखार, खांसी, शरीर में दर्द 
आज कल विभिन्‍न प्रकार के मौसमी एनफ्लुएंजा वायरस फैल रहे हैं, जिससे राजस्‍थान, दिल्‍ली, हरियाणा और पंजाब में तेजी से बीमारियां फैल रही हैं। इनमें एनफ्लुएंजा ए एच-1एन-1 वायरस काफी खतरनाक है, जिनकी वजह से 2009 में महामारी फैली थी। 
मीडिया के कुछ खास हिस्‍सों में दिखाई जा रही खबरों के बाद इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि मौसमी एनफ्लुएंजा खांसने और छींकने के दौरान एक आदमी से दूसरे आदमी में फैलता है इसमें सुअर या मुर्गियों की कोर्इ भूमिका नहीं है। मौसमी एनफ्लुएंजा से बचने के लिए लगातार हाथ धोते रहना, नाक और मुंह को रूमाल से ढकना और भीड़-भाड़ वाले इलाकों से जाने से बचने जैसे एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं। 
ऐसी बीमारियों के लक्षण बुखार, खांसी, शरीर में दर्द इत्‍यादि हैं। इनका अनुभव होने पर तुरंत इलाज कराना जरूरी है। यह बीमारियां बच्‍चों अथवा बूढ़ों, गर्भवती महिलाओं और मधुमेह, फेफड़े से संबंधित बीमारियों, हृदय रोग, यकृत से जुड़ी बीमारियों, किडनी की बीमारियों, रक्‍त से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्‍त लोगों में ज्‍यादा होती है। ऐसे लोगों को सुझाव दिया जाता है कि मौसमी एनफ्लुएंजा से ग्रस्‍त लोगों के संपर्क में आने से बचें। साथ ही ऐसी स्थिति में ओसेलतामिविर दवा लेने का सुझाव दिया जाता है। (PIB)